Posts

मेरी जिंदगी में आने के लिए मेरे दोस्त तेरा शुक्रिया

तेरी दोस्ती अलग सा अनोखा सा अहसास है। जुड़ गया ना जाने कैसे यह रिश्ता अंजाना सा मैं तो बस इतना जानता हूँ कि तू मेरी जिंदगी में इंसान सबसे खास है। अकेला सा जो जी रहा था मैं जिंदगी से खफा शायद इसलिए खुदा ने दे दिया तुझसा अनमोल तोहफा ना जाने जिंदगी से क्यों अब आस ही आस है। मैं तो बस इतना जानता हूँ कि मेरी जिंदगी में तू इंसान सबसे खास हैं। कभी कभी डर जाता हूँ की खो ना दूँ तेरी दोस्ती तेरे साथ बिताना चांहु हर पल करना चांहु मस्ती ना जाने क्यों ये दिल मांगता बस एक ही अरदास है मैं तो बस इतना जानता हूँ कि मेरी जिंदगी में तू इंसान सबसे खास हैं। यार है तू मेरा तेरी यारी मेरी जान है तेरी दोस्ती ही चारों और अब मेरी पहचान है। ना जाने जब तू साथ ना हो तो क्यों लगता सब बकवास है। मैं तो बस इतना जानता हूँ कि मेरी जिंदगी में तू इंसान सबसे खास हैं। मेरी जिंदगी में आने के लिए मेरे दोस्त तेरा शुक्रिया

एक पिता की अपने पुत्र से उम्मीद

जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा! जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा, एकदम जर्जर बूढ़ा, तब तू क्या थोड़ा मेरे पास रहेगा? मुझ पर थोड़ा धीरज तो रखेगा न? मान ले, तेरे महँगे काँच का बर्तन मेरे हाथ से अचानक गिर जाए या फिर मैं सब्ज़ी की कटोरी उलट दूँ टेबल पर, मैं तब बहुत अच्छे से नहीं देख सकूँगा न! मुझे तू चिल्लाकर डाँटना मत प्लीज़! बूढ़े लोग सब समय ख़ुद को उपेक्षित महसूस करते रहते हैं, तुझे नहीं पता? एक दिन मुझे कान से सुनाई देना बंद हो जाएगा, एक बार में मुझे समझ में नहीं आएगा कि तू क्या कह रहा है, लेकिन इसलिए तू मुझे बहरा मत कहना! ज़रूरत पड़े तो कष्ट उठाकर एक बार फिर से वह बात कह देना या फिर लिख ही देना काग़ज़ पर। मुझे माफ़ कर देना, मैं तो कुदरत के नियम से बुढ़ा गया हूँ, मैं क्या करूँ बता? और जब मेरे घुटने काँपने लगेंगे, दोनों पैर इस शरीर का वज़न उठाने से इनकार कर देंगे, तू थोड़ा-सा धीरज रखकर मुझे उठ खड़ा होने में मदद नहीं करेगा, बोल? जिस तरह तूने मेरे पैरों के पंजों पर खड़ा होकर पहली बार चलना सीखा था, उसी तरह? कभी-कभी टूटे रेकॉर्ड प्लेयर की तरह मैं बकबक करता रहूँगा, तू थोड़ा कष्ट करके सुनना। मेरी खिल्ली मत उड़ाना प्लीज़। मेरी बकब...

मैं " पुरुष " हूँ...

मैं " पुरुष " हूँ... मैं भी घुटता हूँ , पिसता हूँ टूटता हूँ , बिखरता हूँ भीतर ही भीतर रो नही पाता कह नही पाता पत्थर हो चुका तरस जाता हूँ पिघलने को क्योंकि मैं पुरुष हूँ.. . मैं भी सताया जाता हूँ जला दिया जाता हूँ उस दहेज की आग में जो कभी मांगा ही नही था स्वाह कर दिया जाता हैं मेरे उस मान-सम्मान का तिनका - तिनका कमाया था जिसे मैंने मगर आह नही भर सकता  क्योकि मैं पुरुष हूँ.. . मैं भी देता हूँ आहुति विवाह की अग्नि में अपने रिश्तों की हमेशा धकेल दिया जाता हूं रिश्तों का वजन बांध कर जिम्मेदारियों के उस कुँए में जिसे भरा नही जा सकता मेरे अंत तक कभी कभी अपना दर्द बता नही सकता किसी भी तरह जता नही सकता बहुत मजबूत होने का ठप्पा लगाए जीता हूँ क्योंकि मैं पुरुष हूँ.. . हॉ.. मेरा भी होता है बलात्कार उठा दिए जाते है मुझ पर कई हाथ बिना वजह जाने बिना बात की तह नापे लगा दिया जाता है सलाखों के पीछे  कई धाराओं में क्योंकि मैं पुरुष हूँ.. . सुना है जब मन भरता है तब आंखों से बहता है मर्द होकर रोता है मर्द को दर्द कब होता है टूट जाता है तब मन से आंखों का वो रिश्ता तब हर कोई कहता है.. तो सुनो ... स...

खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं.........!

खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं, जिसे भी देखो परेशान बहुत हैं।  करीब से देखा तो निकला रेत का घर, मगर दूर से इसकी शान बहुत हैं।  कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत हैं।  मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी, यूं तो कहने को इंसान बहुत हैं।

किसी किसी रोज यूहीं बैठे बैठे हुक सी उठती हैं दिल में

किसी किसी रोज यूहीं बैठे बैठे हुक सी उठती हैं दिल में बेतहाशा बेतमाशा फूट फूट कर रोने की।  ना कोई शख्स जहन में होता हैं,  ना दुख दर्द तकलीफ कोई,  बस एक बेतुकी सी हठ सब कुछ छोड़ने की,  शरीर मानो सारा शुन्न सा हो गया हो,  कोई शख्स भीतर अपने ही दफन हो गया हो,   कानों में बेतहाशा शोर के बीच गूंजते सन्नाटे,  जैसे कोई अपनी ही चीखों से बहरा हो गया हो,  जमाने में जाने ये कैसी रिवायते हैं,  हर किसी को बस खुशी की चाहते हैं।  ना खुशी, ना सुकून की है कोई तलब मुझे,  कोई तो बीमारी बहुत अलग हैं मुझे।

अच्छा लगता हैं.............!

Image
मुझे अब नींद की तलाश नहीं , अब रातों को जागना अच्छा लगता हैं ,   मुझे नहीं मालूम कि वो मेरी किस्मत में हैं या नहीं , मगर भगवान से उसे मांगना अच्छा लगता हैं ,   जाने मुझे हक हैं या नहीं मगर, उसकी अपनी जान से ज्यादा “ परवाह करना ” अच्छा लगता हैं ,   उस से प्यार करना सही हैं या नहीं , पर इस अहसास को जीना अच्छा लगता है ,   कभी हम साथ होंगे या नहीं , पर ये ख्वाब देखना अच्छा लगता हैं ,   “ वो मेरा है या नहीं ”, पर उसे “ अपना ” कहना अच्छा लगता हैं ,   दिल को बहलाया बहुत , पर मानता ही नहीं , पर इसे भी उसके लिए   धड़कना   अच्छा लगता है।